चंद्रयान-3 के बाद अब विक्रम-1 जनवरी में हो सकता है लांच , क्यों इतना चर्चा में है

Vikram-1 राकेट भारत के हैदराबाद में एक कंपनी स्काईरूट ने मंगलवार को विक्रम-1 का अनावरण किया और इसकी पेलोड झमता 300 किलोग्राम है भारत ने चंद्रयान-3 के बाद आदित्य L-1 को सूर्य के कच्चा में वीजने के बाद अब भारत के एक कंपनी जो हैदराबाद में स्थित स्काईरूट ने ये एलान कर दिया है की जनवरी में ही विक्रम-1 वेजा जायेगा ये अंतरिष्क क्षेत्र में एक नया आस जगा है

आपको पता होना चाहिए की भारत देश में चंद्रयान-3 की सफरलांडिंग के बाद अब vikram-1 की खूब चर्चा हो रही है इन दिनों और इसका कलर नीला है और अगले ही साल जनवरी में स्काईरूट कंपनी ने इस एयर स्पेस को लॉन्चिग करने की तयारी कर ली है आपको जानकारी होना चाहिए की ये जो कंपनी है वो पिछड़े ही साल भारत में निजी तौर पे निर्मित राकेट विक्रम यस को लॉच किया था जो इस कंपनी ने एक इतिहास रच दिया था अपने राकेट को सब ओपटिरटल स्पच में वेजकर

भारत में एक स्काईरूट प्रावेट कंपनी है जो मंगलवार को हैदरावाद में स्तिथ है वो 8 मंजिला मॉल्टी स्टेज लॉच वाहन vikram-1 का अनावरण किया और इसकी पेलोड झमता लगभग 300 किलोग्राम है ये उपग्रहों की निचली पृथ्बी की काझा( leo) में रखने की झमता रखता है 

पवन कुमार चन्द्रमा जो स्काईरूट के सह संथापक और सीईओ है जो ये कहा है की vikram-1 भारत का पहला आल कार्बन फाइबर बड़ी वाला राकेट होगा और इसका जो बॉडी है वो 3 डी प्रिंटेड लिकुड इंजन से पूरा लाश है लेकिन ये एक कमर्सियल होगा विक्रम -1 मिशन भारत का | स्काईरूट पूरी तरह से निजी होने के बाद भी सरकार की मदत से अगले डेड साल में 3 से 4 विक्रम -1 मिशन बनाया जायेगा

विक्रम -1 क्यों है इतना खास भारत के लिए

विक्रम -1 बहुत सारे उपग्रह को कच्चा में पहुंचने की झमता रखता है

विक्रम -1 8 मंजिला एक राकेट है

विक्रम -1 300 किलो पेलोड को पृथ्बी की निचली कश्चा में पहुंचने की झमता रखता है

विक्रम -1 कार्बन फाइबर के त्वचा से बना एक राकेट है

विक्रम -1 से पहले विक्रम यस राकेट सफर लांच के बाद ये दूसरा राकेट है

विक्रम -1 का नाम भारत के हशहूर वैज्ञानिक और इसरो के संथापक विकर्म सलभाई के नाम पर रखा गया है और अभी हार में ही इसरो के चीफ डॉ यस सोमनाथ ने स्काईरूट कंपनी का अन्नवरण किया है

विक्रम -1 एक बहुत ही छोटा लॉच व्हीकल है जो 480 किलोग्राम तक के पेलोड को आंतरिक में 500 किलोमीटर उचाई तक ले जा सकता है इसका मुख्य उदेश छोटे सेतलीघट को लॉच करना है

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