Aditya-L Launched: आदित्य L1 कब पहुंचेगा , क्या काम है उसका , सूर्य का अद्ययन क्यों जरुरी है जाने पूरा बात

चंद्रयान 3 के सफर लैंडिंग के लगभग 2 वीक भी नहीं हुआ था  तब ही इसरो एक बार भीड़ से इतिहास रच दिया आदित्य L1 मिशन सफर हो गया । अब हम कह सकते है की इसरो की नजर चाँद पे नहीं सूर्य पे है आइये समझते है इस मिशन के बारे में पूरी डेटसिलस में ।

Launch- इसरो ने आदित्य L1 2 सितम्बर को सूर्य का पहला मिशन और भारत का भी पहला मिसिन सफरपूर्ण तरीका से लांच कर दिया जगह था श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेश सेंटर ।

 Aditya-L Launched: आदित्य L1 कब पहुंचेगा , क्या कब है उसका , सूर्य का अद्ययन क्यों जरुरी है जाने पूरा बात

आदित्य L1 कब पहुंचेगा – श्री हरिकोटा से आदित्य L1 लांच हुआ सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 2 सितम्बर को शनिवार दिन था 11 बजकर 50 मिनट्स पर इसे लांच करने के लिया किया था इस्तेमाल पोलर सीतेलाइट व्हीकल {PSLV-C57}

आदित्य L1 लांच के बाद pslb-c57 रॉकेट के मदत से धरती की निचली कैशा में स्तापित करेगा । कुछ सिस्टम की मदत से इसे आदित्य L1 की कच्चा में बढ़ाया जायेगा और फिर ओन बोर्ड प्रोपल्शन का use करके अंतरिक्ष यान को L1 बिंदु की आवर में लेजायेगा । करीब 4 मंथ के बाद के बाद हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जायेगा

आदित्य L1 का काम क्या है ? – आदित्य L1 का काम सूर्य के तापमान का अध्यन करना है जैसे की प्लेयर्स पर रिशर्च करना , क्रोमोस्फेरिक और कोरोनल हिटिंग का अध्यन , सूर्य की कोरोना का तापमान अध्ययन करना , कोरोनल और कोरोनल लूप का निदान करना ,tapman का अध्यन करना, घनत्व का अध्यन करना , सूर्य के आसपास के हवा का अध्यन करना , सूर्य की गति का अध्ययन करना , संरचना का अध्यन करना , सूर्य का गति का अध्यन करना ,

आदित्य L1 का पूरा सफर जाने – पृथ्वी की कैशा में छोड़ा आदित्य L1 को PSLV रॉकेट से । 16 दिन तक पृथ्बी के कैशा में  रहेगा 110 दिन के सफर के बाद आदित्य L1 आदित्य ऑब्जर्वेटरी पॉइंट पर पहुंचेगा । फिर थ्रस्टर फायरिंग के जरिये L1 को औरबिट में पंहुचा दिया जागेगा ।

आदित्य L1 कितने पेलोड लगा है ?

आदित्य L1 में कुल 7 पेलोड लगा है जो सूर्य का अध्यन करेगा और हमें सिस्टम के जरिया सारा जानकारिया वेजेगा

7 पेलोड का काम क्या है जाने ?

1-PAPA  {प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर adiya}-  जिसका काम है सूर्य के हॉट हवाओ का अध्यन करना

2- VELC  { बिजिबल लाइन एमिसन कोरोनाग्राफ } – जिसका काम है सूर्य की हाई क्वालिटी का फोटो और वीडियो लेगा

3-MAG { एडवांस ड्राई ेसियल हाई रेसलयूशन डिजिटल मैग्नेटिक }- जिसका काम है मैग्नेटिक फील्ड की ाद्यान करना

4- ASPEX  { आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपरिमेंट }-jiska काम है अल्फ़ा पार्टिकल का अध्यन करना

5-SUIT { सोलर अल्ट्रावायलट िमागिन टेलेस्कोप } – जिसका काम है सूर्य की अल्ट्रा वॉलेट वेबलेंथ की फोटो लेना

6-HEL10S { हाई एनर्जी L1 आरबिटल x-ray स्पेक्ट्रोमीटर }- जिसका काम है हाई एनर्जी x-ray की अध्यन करना

तो आप ये तो समझ ही गए होंगे की धरती से बहार निकल ही ये मेज़रमेंट ले सकते है क्यूंकि हमारे धरती पे बहुत सरे रे नहीं आती है धरती रोकती है इन सरे रे को इसलिए बहार निकल ही ये हो सकता है और ये सब करना इंसान के लिए बहुत ही बढ़िया है लेकिन अध्यन करने के लिए बढ़िया नहीं है

बाकि और सूर्य  के मिशन के बारे में बात की जाये तो 2018 में नासा के द्वारा लांच किया गया था जिसका नाम  पार्कर सोलर सुन के जो कोरोना के जो लेयर है उसके साथ डायरेक्ट कांटेक्ट बनाना था इसके साथ एक सोलर ऑर्बिटर भी था जो नासा और esa द्वारा लांच किया गया था 2020 में सब का मकसद एक ही था की हम सूर्य को बेहतर समझ सके और सूर्य से हानिकारक जो वेब है उसे हम समझ पाए

 

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